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DNS Explained in Hindi | Domain Name System Tutorial | DNS KYA HAI ? |DNS Part 1: video thumbnail

DNS Explained in Hindi | Domain Name System Tutorial | DNS KYA HAI ? |DNS Part 1 transcript

JagvinderThind · @JagvinderThind

Published April 4, 20136:23465.6K views

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Opening (first 30 seconds)

हेलो फ्रेंड्स, मेरा नाम जगविंदर है। चलिए, इस वीडियो में हम जानते हैं डीएनएस के बारे में। मान लीजिए हमारा एक नेटवर्क है जिसमें बहुत सारे पीसी आपस में कनेक्टेड हैं। इन पीसीस के ऊपर हमने IPपी एड्रेस कॉन्फ़िगर कर रखा है ताकि यह आपस में कम्युनिकेट कर सकें। और जब एक कंप्यूटर को दूसरे कंप्यूटर से किसी डेटा या सर्विस की जरूरत हो, तो हम इस IPपी एड्रेस को यूज़ करके उसे एक्सेस कर सकते हैं। हमारे कंप्यूटर सिस्टम्स नंबर्स में डील करते हैं। यानी कि जीरो और

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Transcript

हेलो फ्रेंड्स, मेरा नाम जगविंदर है। चलिए, इस वीडियो में हम जानते हैं डीएनएस के बारे में। मान लीजिए हमारा एक नेटवर्क है जिसमें बहुत सारे पीसी आपस में कनेक्टेड हैं। इन पीसीस के ऊपर हमने IPपी एड्रेस कॉन्फ़िगर कर रखा है ताकि यह आपस में कम्युनिकेट कर सकें। और जब एक कंप्यूटर को दूसरे कंप्यूटर से किसी डेटा या सर्विस की जरूरत हो, तो हम इस IPपी एड्रेस को यूज़ करके उसे एक्सेस कर सकते हैं। हमारे कंप्यूटर सिस्टम्स नंबर्स में डील करते हैं। यानी कि जीरो और वन के फॉर्मेट में। लेकिन हम ह्यूमंस को चीजों को उनके नंबर से याद रखना एक हद तक तो ठीक है लेकिन इसकी अपनी लिमिटेशन है। लेकिन हम ह्यूमंस को चीजों के नाम आसानी से याद रह जाते हैं। तो हम इन कंप्यूटरटर्स को कुछ लॉजिकल नेम दे देते हैं ताकि इन कंप्यूटरटर्स को उनके नाम से भी सर्च करवाया जा सके। इसी तरीके से जब आपके यह कंप्यूटरटर्स या आप जब घर में बैठे इंटरनेट एक्सेस कर रहे होते हैं तब इंटरनेट पर पड़ी हुई वेबसाइट्स को या वेब पेजेस को आप नाम से ही सर्च करवाते हैं ना कि उनके IPपी एड्रेस से। लेकिन इंटरनेट पर पड़े हुए उन कंप्यूटरटर्स का भी कोई ना कोई IPपी एड्रेस होता है। तो इन चीजों का ध्यान कौन रखता है? तो यहीं से डीएनएस का काम स्टार्ट होता है? डीएनएस को डोमेन नेम सिस्टम कहा जाता है क्योंकि इसके नाम में ही नेम सिस्टम है। यह नेम सर्विज को प्रोवाइड करता है। नेम सर्विज वो सर्विज होती हैं जिनकी हेल्प से नेम रेजोल्यूशन किया जाता है। यानी कि नेम टू IP और IP टू नेम रेजोल्यूशन। जैसे कि आपको किसी कंप्यूटर या वेबसाइट का नाम पता है तो आपको उसका IPपी एड्रेस जानने की जरूरत नहीं है। जैसे कि एक कंप्यूटर है या वेब सर्वर है जिसके ऊपर वेबसाइट होस्टेड है। उस वेब सर्वर को उसके ओनर्स ने या एडमिनिस्ट्रेटर्स ने एक नाम दिया हुआ है और इस नाम की एंट्री उसके IPपी एड्रेस के साथ उन्होंने डीएनएस सर्वर पर करवा रखी है। तो जैसे ही आप उस वेब सर्वर को या कंप्यूटर को उसके नाम से सर्च करेंगे तो बैकग्राउंड में डीएनएस आपकी क्वेरी को सॉल्व करेगा। डीएनएस उस नाम को उस कंप्यूटर के या वेब सर्वर के IPपी एड्रेस से ट्रांसलेट करेगा और आपको डायरेक्टली उस वेब सर्वर से कनेक्ट कर देगा। यह प्रोसेस यूज़र्स के लिए ट्रांसपेरेंट रहता है। यानी कि उन्हें कभी भी यह जानने की जरूरत नहीं रहती है कि किस कंप्यूटर का क्या IP एड्रेस है। या दूसरे शब्दों में कहें कि अगर हमें किसी कंप्यूटर का नाम पता है तो डीएनएस उसका IPपी एड्रेस पता लगाने में हमारी हेल्प करता है या फिर बिल्कुल इससे उल्टा अगर हमें उसका IPपी एड्रेस मालूम है तो उसके नाम का पता लगाया जा सकता है। इसलिए इसको कहा जाता है कि डीएनएस नेम रेजोल्यूशन के काम आता है। यानी कि नेम टू IP ट्रांसलेशन या फिर IP टू नेम ट्रांसलेशन। इसे समझने के लिए सबसे आसान तरीका है फोन बुक। जैसे कि आपके मोबाइल फस में आप एक फोन बुक क्रिएट करते हैं जिसमें आपके फ्रेंड्स या रिलेटिव्स का नाम आप एंटर करते हैं और उस नाम के साथ उनका फोन नंबर आप उसमें सेव कर लेते हैं तो आपको अपने एक-एक दोस्त या रिश्तेदार के फोन नंबर को याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती है। आप अपने फोन बुक से उसका नाम सर्च करते हैं और उसे कॉल कर देते हैं। बैकग्राउंड में आपका मोबाइल फोन उस नाम को आपके दोस्त के फोन नंबर के साथ ट्रांसलेट कर देता है और आपकी कॉल कनेक्टिविटी आपके दोस्त के साथ एस्टैब्लिश कर देता है। बिल्कुल इसी तरीके से डीएनएस कंप्यूटर नेम्स को उनके IPपी एड्रेस से ट्रांसलेट कर देता है और आपकी कनेक्टिविटी उन कंप्यूटरटर्स के साथ या वेब सर्वर्स के साथ एस्टैब्लिश कर देता है। डीएनएस यूडीपी का पोर्ट नंबर 53 यूज़ करता है। बिल्कुल वैसे ही जैसे डीएससीपी सर्वर पोर्ट नंबर 67 के ऊपर अपनी सर्विज प्रोवाइड करता है। डीएनएस अपनी सर्विज यूडीपी पोर्ट नंबर 53 के ऊपर प्रोवाइड करता है। डीएनएस का यूज़ आप इंटरनेट या अपने प्राइवेट नेटवर्क्स पर कर सकते हैं। आज के सिनेरियोस में विदाउट डीएनएस इंटरनेट की कल्पना भी नहीं की जा सकती। आप सोच भी नहीं सकते कि बिना डीएनएस के इंटरनेट वर्क कर सकता है क्योंकि बिना डीएनएस के आपको एक-एक वेबसाइट या वेब सर्वर का IPपी एड्रेस याद रखना होगा और दुनिया में कितनी साइट्स हैं, कितने बिजनेसेस हैं, उन सबके IPपी एड्रेसेस याद रखने अपने आप में एक मुश्किल काम है। लेकिन आप सिंपली उन वेब सर्वर्स को चाहे वह Sisco का हो, चाहे वह Microsoft का हो, चाहे वह Google हो, उसको उसके नाम से आसानी से सर्च करवा देते हैं। और डीएनएस बैकग्राउंड में उस नाम को उन सर्वर्स के IPपी एड्रेस से ट्रांसलेट कर देता है और आपकी कनेक्टिविटी एस्टैब्लिश कर देता है। चलिए अब जरा डीएनएस से पहले नेम रेोल्यूशन के लिए क्या सिस्टम था उसके बारे में डिस्कस करते हैं। डीएनएस से पहले नेम रेोल्यूशन के लिए होस्ट डॉट टेक्स्ट फाइल को यूज़ किया जाता था। आज के मॉडर्न ऑपरेटिंग सिस्टम्स में भी आपको यह फाइल देखने को मिल जाती है। इस फाइल को एक सेंट्रलाइज लोकेशन पर रखा जाता था जिसे आज श्री इंटरनेशनल कहा जाता है। वहां पर रखे हुए कंप्यूटर पे यह होस्ट डॉट टेक्स्ट फाइल को होस्ट किया जाता था और कंप्यूटरटर्स या होस्ट को यह फाइल उस सर्वर से डाउनलोड करनी होती थी। लेकिन इस फाइल की कुछ लिमिटेशंस थी। जैसे कि इसमें एक-एक एंट्री मैनुअल करनी होती थी। और दूसरी बात कि यह फ्लैट स्ट्रक्चर था और फ्लैट स्ट्रक्चर को एक लिमिट के बाद मैनेज करना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। इसलिए इसका कोई अल्टरनेट ढूंढा जाने लगा और इसके अल्टरनेट के रूप में डीएनएस एग्जिस्टेंस में आया। डीएनएस हिरारकिकल स्ट्रक्चर को यूज करता है। यानी कि ऐसा स्ट्रक्चर जिसकी शेप इनवर्स ट्री फॉर्मेट में होती है और यह डिस्ट्रीब्यूटेड होता है। डीएनएस के इस इनवर्स ट्री स्ट्रक्चर में क्योंकि ट्री इनवर्स है या उल्टा है तो ट्री की रूट ऊपर है। यानी कि अथॉरिटी एक जगह से स्टार्ट होती है और फिर वो डिस्ट्रीब्यूट होती चली जाती है और डिस्ट्रीब्यूशन होने के साथ-साथ हर जगह की रिस्पांसिबिलिटी या अथॉरिटी दूसरे सर्वर्स को दी जा सकती है। हम इस स्ट्रक्चर के बारे में आगे डिटेल में डिस्कस करेंगे। चलिए अब मैं आपसे एक क्वेश्चन पूछता हूं। आप मुझे बताएं कि डीएनएस से पहले नेम रेोल्यूशन के लिए हम किस फाइल को यूज किया करते थे? आपकी ऑप्शंस हैं ए डीएनs डॉट टेक्स्ट फाइल, बी नेम डॉट टेक्स्ट फाइल या फिर सी होस्ट डॉट टेक्स्ट फाइल। आप इस क्वेश्चन का आंसर नेक्स्ट 20 सेकंड्स में नीचे कमेंट्स में जरूर टाइप करें। तो इस वीडियो में हमने डीएनएस के कुछ कांसेप्ट्स के बारे में जाना। तो इस वीडियो में इतना ही।

The words are the caption track's own and nothing is reworded or re-transcribed. Paragraph breaks are placed between sentences so the text reads as prose.

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